लोकतंत्र की मिसाल बना पीतमपुरा वरिष्ठ नागरिक मंच का चुनाव, बुजुर्गों ने पेश की निष्पक्षता और सामाजिक सरोकार की अनूठी नजीर
- टी.एन. शेषन जैसी सख्ती: नियमों से समझौता नहीं, बेबाकी से दिया जवाब - सामूहिक ताकत से होगा बदलाव: क्यों जरूरी हैं बुजुर्गों के ऐसे संगठन?

-दिल्ली दर्पण ब्यूरो
उत्तरी दिल्ली। दिल्ली के पीतमपुरा (GP/F-P ब्लॉक) स्थित 'वरिष्ठ नागरिक मंच' के हाल ही में संपन्न हुए चुनाव क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए है। यह चुनाव केवल एक संस्था का फेरबदल नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक अनुकरणीय नजीर बन गए हैं। 6 प्रमुख पदों के लिए आयोजित इस चुनाव में राजनीति के वे सभी रंग देखने को मिले जिनके लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया जानी जाती है—वैचारिक मतभेद, रणनीतिक दांव-पेच और उत्साही बहस। लेकिन इन सब के बीच जिस बात ने सबसे ज़्यादा ध्यान खींचा, वह थी बुजुर्गों की परिपक्वता, चुनाव अधिकारियों की निष्पक्षता और समाज कल्याण के लिए काम करने की अडिग इच्छाशक्ति। संस्था में उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के पदों पर सर्वसम्मति से प्रत्याशी चुने गए, जबकि बाकी पदों पर भी समर्पित विचारधारा वाले पैनल के उम्मीदवारों ने शानदार जीत हासिल की ।
टी.एन. शेषन जैसी सख्ती: नियमों से समझौता नहीं, बेबाकी से दिया जवाब

चुनाव को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए चुनाव प्रभारियों ने ऐसा कड़ा रुख अपनाया जिसने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन की याद दिला दी। प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर पक्षपात या शिथिलता की गुंजाइश नहीं छोड़ी गई; नियमों का पालन इस कदर सख्त था कि गलत या एक जैसे हस्ताक्षर होने के कारण नामांकन तक रद्द कर दिए गए। जब इस सख्ती पर सवाल उठे और विपक्ष ने आरोप लगाए, तो निवर्तमान प्रधान ने भी पूरे धैर्य और तार्किकता से उनका जवाब दिया। इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि जीवन का यह पड़ाव बिना किसी दबाव के सही को सही और गलत को गलत कहने का हौसला रखता है।

सामूहिक ताकत से होगा बदलाव: क्यों जरूरी हैं बुजुर्गों के ऐसे संगठन?
पीतमपुरा का यह चुनाव इस बात का स्पष्ट संदेश देता है कि पारिवारिक उत्तरदायित्वों को पूरा करने के बाद बुजुर्गों के पास जो समय, अनुभव और समझ होती है, वह समाज के लिए एक अमूल्य निधि है। प्रशासनिक स्तर पर क्षेत्र की समस्याओं को सुलझाने के लिए व्यक्तिगत प्रयासों की तुलना में एक संगठित समूह की आवाज़ कहीं अधिक प्रभावशाली होती है। आज उत्तर-पश्चिम दिल्ली के समृद्ध और शिक्षित क्षेत्रों—जैसे अशोक विहार, रोहिणी, शालीमार बाग और मॉडल टाउन—में सक्रिय वरिष्ठ नागरिक संस्थाएं प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ निरंतर संवाद और संघर्ष के जरिए शानदार परिणाम दे रही हैं। अनुभव से भरपूर ये बुजुर्ग न तो खुद गुमराह होते हैं और न ही दूसरों को होने देते हैं।
नए संकल्पों के साथ मैदान में उतरी पीतमपुरा वरिष्ठ नागरिक मंच की नई टीम
चुनावी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद संस्था की नई कार्यकारिणी नए संकल्पों और जनहित की योजनाओं के साथ कार्यभार संभालने के लिए पूरी तरह तैयार है। नई कार्यकारिणी में प्रधान पद पर धर्मवीर गुप्ता, वरिष्ठ उपप्रधान पद पर इंद्र पॉल अरोड़ा, उपप्रधान पद पर राजेश गुप्ता, महामंत्री पद पर बृजमोहन मित्तल, कोषाध्यक्ष पद पर प्रमोद कुमार अग्रवाल तथा सह सचिव पद पर सतीश कुमार नागपाल निर्वाचित हुए हैं।
रिटायरमेंट नहीं, यह तो समाज सेवा की नई और सशक्त शुरुआत है
पीतमपुरा के वरिष्ठ नागरिकों ने यह साबित कर दिया है कि बढ़ती उम्र या सेवानिवृत्ति का मतलब निष्क्रिय होना नहीं है, बल्कि यह तो निस्वार्थ भाव से समाज को वापस लौटाने (Giving Back to Society) की एक नई पारी की शुरुआत है। जब अनुभव, दृढ़ इच्छाशक्ति और जिद्द एक साथ मिलते हैं, तो प्रशासन से भी काम करवाया जा सकता है और यही इस चुनाव का सबसे बड़ा संदेश है।
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