मेरठ: कैंटीन का बिल पास करने के बदले 1.35 लाख रुपये घूस लेते डेयरी संस्थान की प्रिंसिपल गिरफ्तार
परतापुर स्थित सहकारी डेयरी प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान की प्रिंसिपल को एंटी करप्शन टीम ने कैंटीन संचालक से घूस लेते रंगेहाथ पकड़ा।
मेरठ के परतापुर स्थित सहकारी डेयरी प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान की प्रिंसिपल वंदना सिंह को एंटी करप्शन टीम ने सोमवार को 1.35 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई संस्थान परिसर में संचालित कैंटीन के बकाया बिलों के भुगतान की एवज में रिश्वत मांगने के आरोप में की गई है।
संस्थान में कैंटीन संचालित करने वाले ठेकेदार अमित सिवाच ने बताया कि उन्हें मई माह में ही यह ठेका मिला था। प्रशिक्षण के लिए आने वाले किसानों को उनकी कैंटीन से भोजन उपलब्ध कराया जाता था। उनके करीब 3.85 लाख रुपये के बिल लंबित थे, जिन्हें पास कराने के लिए वह लगातार कार्यालय के चक्कर काट रहे थे।
आरोप है कि पहले संस्थान के अकाउंटेंट मुकेश ने बिल पास करने में टालमटोल की और रिश्वत का इशारा किया। इसके बाद जब अमित सिवाच ने प्रिंसिपल वंदना सिंह से मुलाकात की, तो उन्होंने शुरुआत में डेढ़ लाख रुपये की मांग की। बातचीत के बाद यह रकम 1.35 लाख रुपये तय की गई और कथित तौर पर चेतावनी दी गई कि भुगतान न करने पर ठेका रिन्यू नहीं होने दिया जाएगा।
परेशान होकर ठेकेदार ने इस मामले की लिखित शिकायत एंटी करप्शन की मेरठ यूनिट से की। जांच में मामला सही पाए जाने पर टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। अमित सिवाच को केमिकल लगे नोट देकर सोमवार दोपहर करीब तीन बजे प्रिंसिपल के कक्ष में भेजा गया।
जैसे ही वंदना सिंह ने अपनी सीट पर बैठकर रिश्वत की रकम ली, पहले से तैनात एंटी करप्शन टीम ने एक गवाह की मौजूदगी में उन्हें रंगेहाथ दबोच लिया। टीम ने मौके से केमिकल लगे नोट भी बरामद कर लिए।
कार्रवाई के दौरान संस्थान परिसर में हड़कंप मच गया और इस बीच आरोपी अकाउंटेंट मुकेश अपनी सीट छोड़कर मौके से फरार हो गया। टीम ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह हाथ नहीं आया।
मूलरूप से कानपुर की निवासी वंदना सिंह कुछ महीने पहले ही नोएडा पीसीडीएफ में प्रबंधक पद से स्थानांतरित होकर मेरठ आई थीं। एंटी करप्शन यूनिट के इंस्पेक्टर दुर्गेश सिंह के अनुसार, आरोपी प्रिंसिपल को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और उन्हें मंगलवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
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