सामग्री पर जाएँ
ताज़ा
छठ पर्व से पहले मुनक नहर के घाटों का कायाकल्प, मुख्यमंत्री ने सिंगलपुर में लिया निर्माण कार्यों का जायजाअमेरिकी मध्यावधि चुनाव: डेमोक्रेट्स के प्रचार में उतरीं कमला हैरिस, 2028 में राष्ट्रपति उम्मीदवारी पर सस्पेंस बरकरारशिक्षा मंत्री आशीष सूद का पलटवार: AAP के 'बुक स्कैम' आरोपों को बताया बेबुनियाद, दस्तावेज़ों के साथ पेश किए सबूतमुजफ्फरनगर: कई चर्चित मामलों में फांसी की सजा सुनाने वाले जज रवि कुमार दिवाकर का फैमिली कोर्ट में तबादलादिल्ली के तीन प्रमुख स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, तलाशी में कुछ नहीं मिलायमुना किनारे 99 करोड़ की दीवार सहित दिल्ली सरकार ने 622 करोड़ रुपये की बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को दी मंजूरी

शांति बांड नोटिस के खिलाफ आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट से खारिज

उच्च न्यायालय ने कहा कि विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पास शांति भंग की आशंका पर नोटिस जारी करने के पर्याप्त आधार थे।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
शेयर
24 अक्तूबर 2026 · 7:23 am583 व्यूज़
शांति बांड नोटिस के खिलाफ आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट से खारिज
शांति बांड नोटिस के खिलाफ आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट से खारिज — Hindustan Times

दिल्ली उच्च न्यायालय ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (एसईएम) द्वारा जारी शांति बांड नोटिस को चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि मजिस्ट्रेट के पास यह कानूनी कदम उठाने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई महज सुनी-सुनाई बातों पर आधारित नहीं थी।

नई दिल्ली जिले के एसईएम ने 17 अक्टूबर को नेहा बोरा को नोटिस जारी किया था। इसमें उनसे पूछा गया था कि जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए उनसे 10,000 रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और एक जमानतदार क्यों न मांगा जाए। यह नोटिस 16 अक्टूबर को आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में बोरा के शामिल होने के बाद जारी किया गया था।

अदालत ने पाया कि एसईएम ने प्राप्त जानकारी, 17 अक्टूबर के कलंदरा और विभिन्न पुलिस थानों की तीन जनरल डायरी प्रविष्टियों पर गौर करने के साथ-साथ तीन गवाहों से भी पूछताछ की थी। पीठ के अनुसार, इस प्रक्रिया ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 130 के तहत तय कानूनी आवश्यकताओं को पूरी तरह संतुष्ट किया।

अपने 46 पन्नों के फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि बीएनएसएस के अध्याय 9 के तहत की जाने वाली कार्यवाही दंडात्मक नहीं, बल्कि एहतियाती प्रकृति की होती है। ऐसे में शांति भंग होने की आशंका पर राय कायम करते समय मजिस्ट्रेट के लिए व्यापक स्तर पर तथ्य-जांच करना अनिवार्य नहीं है।

पीठ ने रेखांकित किया कि मंडी हाउस जैसे इलाके में कई बैंक, दफ्तर, होटल और वेंडर मौजूद हैं और उस क्षेत्र में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत पहले से ही निषेधाज्ञा लागू थी। अदालत ने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए यह नहीं माना जा सकता कि एसईएम के समक्ष याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आधार नहीं थे।

सुनवाई के दौरान बोरा के वकील ने तर्क दिया था कि यह नोटिस बिना सोचे-समझे 'कट-एंड-पेस्ट' तरीके से जारी किया गया था और जरूरी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और स्थायी वकील आशीष दीक्षित ने दलील दी कि यह नोटिस पर्याप्त साक्ष्यों और विवेक के इस्तेमाल के बाद जारी हुआ था।

अदालत ने याचिका खारिज करते हुए दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि जब याचिकाकर्ता एसईएम के समक्ष पेश हों, तो उन्हें नोटिस से संबंधित सभी दस्तावेज मुहैया कराए जाएं। इसके साथ ही मजिस्ट्रेट को भी आदेश दिया गया कि कोई भी बांड मांगने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए।

इनसे संबंधितdelhi-ncrDelhi High CourtAISANeha BoraDelhi Police
शेयर

लेखक

टिप्पणियाँ

0

चर्चा में शामिल होने के लिए साइन इन करें। टिप्पणियाँ शिष्टता के लिए संचालित होती हैं।

आगे पढ़ें

संबंधित कवरेज

शिक्षा मंत्री आशीष सूद का पलटवार: AAP के 'बुक स्कैम' आरोपों को बताया बेबुनियाद, दस्तावेज़ों के साथ पेश किए सबूत901

शिक्षा मंत्री आशीष सूद का पलटवार: AAP के 'बुक स्कैम' आरोपों को बताया बेबुनियाद, दस्तावेज़ों के साथ पेश किए सबूत

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने AAP के बुक स्कैम आरोपों को खारिज करते हुए दस्तावेज़, टेंडर और पुस्तकों के जरिए प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना पक्ष रखा।

जामिया में छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे कांग्रेस और सपा सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लिया725

जामिया में छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे कांग्रेस और सपा सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लिया

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ बहाली को लेकर चल रहे धरने में शामिल होने पहुंचे इमरान मसूद और मोहिबुल्लाह नदवी को पुलिस ने बाहर ही रोका।

गुरुग्राम: बिजली निजीकरण के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, फर्रुखनगर में तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन122

गुरुग्राम: बिजली निजीकरण के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, फर्रुखनगर में तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

फर्रुखनगर में कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म कराने और आपूर्ति बहाल करने की मांग की।