दिल्ली विश्वविद्यालय: यौन उत्पीड़न मामले में हाई कोर्ट के आदेश का पालन न होने पर परिषदों ने वीसी से की कार्रवाई की मांग
दिल्ली विश्वविद्यालय की सर्वोच्च परिषदों ने कुलपति योगेश सिंह को पत्र लिखकर एक कॉलेज से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में अदालत के निर्देशों का अनुपालन करने का आग्रह किया है।

दिल्ली दर्पण ब्यूरो रिपोर्ट :-
दिल्ली विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद और कार्यकारी परिषद ने कुलपति योगेश सिंह से एक कॉलेज में यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश का तुरंत पालन करने की मांग की है। परिषद के सदस्यों का आरोप है कि अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन छह हफ्तों से कार्रवाई करने में विफल रहा है। इस संबंध में गवर्निंग बॉडी के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र कुलपति को भेजा गया है।
परिषदों द्वारा उठाए गए चिंताओं के अनुसार, मामले की याचिकाकर्ता दो महिला प्रोफेसरों को कॉलेज में लगातार शत्रुतापूर्ण माहौल का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के कारण उन्हें मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है, जिससे उनके कार्य प्रदर्शन और पेशेवर क्षमताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यह मुद्दा अकादमिक परिषद की 24 जुलाई और कार्यकारी परिषद की 30 जुलाई की बैठकों के दौरान शून्य काल में प्रस्तुत एक नोट के जरिए उठाया गया।
यह पूरा मामला एक कॉलेज की तीन महिला शिक्षकों द्वारा पुरुष प्रोफेसरों के एक समूह के खिलाफ आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) में दी गई शिकायत से शुरू हुआ था। 17 जुलाई की अपनी औपचारिक शिकायत में महिला शिक्षकों ने अनुचित टिप्पणियों, लैंगिक रूप से आक्रामक बयानों और शारीरिक धमकियों के गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि वीडियो साक्ष्य प्रस्तुत करने के बावजूद समिति ने पर्याप्त सबूत न होने का हवाला देकर कार्रवाई आगे बढ़ाने से मना कर दिया।
आईसीसी की कार्यशैली से असंतुष्ट होकर दो महिला प्रोफेसरों ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि कॉलेज की आंतरिक शिकायत समिति ने उनकी शिकायतों पर निष्पक्ष जांच नहीं की। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, चूंकि आरोप गवर्निंग बॉडी और आईसीसी के खिलाफ थे, इसलिए जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई थी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 18 मई को अपने आदेश में, जिसे 26 मई को संशोधित किया गया था, टिप्पणी की कि आईसीसी की सिफारिशों के खिलाफ अपील पर किसी भी प्राधिकारी द्वारा निर्णय नहीं लिया गया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए उच्च न्यायालय ने कुलपति को निर्देश दिया था कि वे स्वतंत्र रूप से इस अपील की समीक्षा करें और छह सप्ताह के भीतर निर्णय लें।
अदालत द्वारा तय की गई समय सीमा बीत जाने के बाद भी कोई निवारण न मिलने पर परिषद के सदस्यों ने कुलपति से इस मामले में जल्द से जल्द कदम उठाने का आग्रह किया है। पीड़ित प्रोफेसरों का कहना है कि एक महीने से अधिक समय बीत जाने और हर संभव प्राधिकारी से संपर्क करने के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिली है।
लेखक




टिप्पणियाँ
0