अशोक विहार चुनाव परिणाम: अग्रवाल वेलफेयर सोसाइटी में अनिल गुप्ता का सूपड़ा साफ, सद्भावना पैनल की ऐतिहासिक जीत के 5 बड़े कारण अशोक विहार, दिल्ली
अशोक विहार अग्रवाल वेलफेयर सोसाइटी के चुनाव में सद्भावना पैनल ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए सभी प्रमुख पदों पर कब्ज़ा कर लिया। समाज ने परिवर्तन, पारदर्शिता और विकास के पक्ष में मतदान करते हुए पूर्व नेतृत्व को स्पष्ट रूप से नकार दिया।

दिल्ली दर्पण ब्यूरो रिपोर्ट :- अशोक विहार की सबसे प्रतिष्ठित और पुरानी संस्था 'अग्रवाल वेलफेयर सोसाइटी' के बहुचर्चित चुनाव परिणामों ने एक नया इतिहास रच दिया है। समाज ने सत्ता-लोलुपता, मनमानी और संविधान से खिलवाड़ करने वालों को दरकिनार करते हुए परिवर्तन के पक्ष में एकतरफ़ा जनादेश दिया है। श्री पवन अग्रवाल (गुप्ता) के नेतृत्व वाले 'सद्भावना पैनल' ने चुनाव में ज़बरदस्त क्लीन स्वीप करते हुए पूर्व प्रधान अनिल गुप्ता (घी वाले) के पूरे ग्रुप का सूपड़ा साफ कर दिया।
सद्भावना पैनल के सभी प्रत्याशियों ने भारी मतों के अंतर से जीत दर्ज की है। इस ऐतिहासिक जीत के बाद अशोक विहार के अग्रवाल समाज में खुशी की लहर है और इसे समाज के स्वाभिमान व विकास का "नया सूर्योदय" कहा जा रहा है।
🛑 आखिर क्यों और कैसे समाज ने दिया सद्भावना पैनल को एकतरफ़ा वोट? चुनावी विश्लेषकों और समाज के बुद्धिजीवियों के अनुसार, अनिल गुप्ता (घी वाले) के खिलाफ समाज का गुस्सा रातों-रात नहीं पनपा, बल्कि पिछले कुछ वर्षों की कार्यशैली ने इस एकतरफ़ा जनादेश की पटकथा लिखी। जानिए जीत और हार के 5 सबसे बड़े कारण:
- संविधान से खिलवाड़ और 'एकाधिकार' की मंशा सोसायटी का संविधान स्पष्ट कहता है कि कोई भी व्यक्ति लगातार दो बार से ज्यादा प्रधान पद पर नहीं रह सकता। लेकिन अनिल गुप्ता ने अपने तीसरे कार्यकाल और सत्ता के मोह में संविधान की इस धारा (कैपिंग) को ही हटा दिया। समाज के करीब 1200 ट्रस्टियों को यह बात नागवार गुजरी कि एक व्यक्ति संस्था को अपनी बपौती समझने लगा है।
- एजीएम (AGM) में वरिष्ठों और बुजुर्गों का अपमान 21 जून को हुई एजीएम में जिस तरह समाज के सम्मानित बुजुर्गों और तटस्थ ट्रस्टियों की अनदेखी और कथित अपमान हुआ, उसने आम समाज को झकझोर कर रख दिया। समाज के वरिष्ठ स्तंभों (श्री अरुण बंसल, श्री सुरेंद्र पाल गुप्ता, श्री अर्जुन दास सिंघल, श्री प्रीतम गुप्ता, श्री भगवान बंसल, श्री जी.डी. गोयल, श्री शंकर लाल सिंघल और श्री दिनेश प्रेमसागर गोयल) के स्वाभिमान को पहुंची चोट ही इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण बनी।
- ठप पड़ी 'अग्रसेन हॉस्पिटल' परियोजना पिछले 5 सालों से अनिल गुप्ता संस्था के शीर्ष पद पर थे, लेकिन महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल का विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ा रहा। समाज के लोग अस्पताल परियोजना को जल्द पूरा होते देखना चाहते थे। हॉस्पिटल न चला पाने और विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ वादे करने से ट्रस्टी बेहद नाराज थे।
- गैर-चुने हुए लोगों के हाथ में कमान संस्था के सदस्यों में इस बात का भी गहरा आक्रोश था कि प्रधान के आधिकारिक अधिकारों का प्रयोग एक ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था, जो संस्था का चुना हुआ प्रतिनिधि तक नहीं था। संस्था चलाने में पारदर्शिता का पूरी तरह अभाव था।
- तटस्थ वरिष्ठों की एकजुटता और सद्भावना टीम का 'विजन' जब समाज के सम्मानित तटस्थ ट्रस्टियों ने खुद आगे आकर 'सद्भावना पैनल' का गठन किया, तो जनता को एक निष्पक्ष और मजबूत विकल्प मिल गया। पवन अग्रवाल जी के शालीन व्यक्तित्व, पारदर्शिता के वादे और अग्रसेन अस्पताल को प्राथमिकता पर शुरू करने के विजन ने मतदाताओं का दिल जीत लिया।
🏆 सद्भावना पैनल के विजयी चेहरे: प्रधान: श्री पवन अग्रवाल (गुप्ता)
वरिष्ठ उपप्रधान: श्री सत्यनारायण केजरीवाल
महामंत्री: श्री राजेंद्र गर्ग
कोषाध्यक्ष: श्री सुशील सिंघल
उपप्रधान (अग्रसेन हॉस्पिटल): श्री राजेंद्र गुप्ता
उपप्रधान (स्कूल): श्री बिमल प्रकाश अग्रवाल
उपप्रधान (अग्रसेन भवन): श्री नवल किशोर गोयल
सह-कोषाध्यक्ष: श्री संजीव नरेश गर्ग
मंत्री: श्री विपुल गोविल
💬 "यह लोकतंत्र और स्वाभिमान की जीत है" जीत के बाद नव-निर्वाचित प्रधान श्री पवन अग्रवाल ने समाज का आभार व्यक्त करते हुए कहा:
"यह जीत किसी पद की जीत नहीं, बल्कि अशोक विहार के हर उस ट्रस्टी के स्वाभिमान की जीत है, जो संस्था में लोकतंत्र और पारदर्शिता देखना चाहता था। हमारी पहली प्राथमिकता अग्रसेन अस्पताल के काम को युद्ध स्तर पर पूरा करना और संविधान की मर्यादा को बहाल करना होगी।"



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