मेरठ के निजी अस्पताल में पूर्व प्रधान की मौत पर भारी हंगामा, परिजनों ने लगाया लापरवाही और मनमानी वसूली का आरोप
हर्रा के पूर्व प्रधान की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही और मनमाने पैसे वसूलने का आरोप लगाते हुए धरना दिया।
मेरठ के साकेत स्थित नमो हॉस्पिटल में बुधवार शाम इलाज के दौरान हर्रा कस्बे के पूर्व प्रधान तैय्यब की मौत हो गई। इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही और अधिक बिल वसूलने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। सूचना मिलते ही सिविल लाइन पुलिस और कई अन्य थानों का बल मौके पर पहुंच गया।
परिजनों के अनुसार तैय्यब को 15 अक्टूबर को ब्रेन हेमरेज होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने उनका ऑपरेशन किया था। मृतक के भाई अलाउद्दीन ने बताया कि बुधवार शाम करीब 7 बजे तक उनकी तैय्यब से बातचीत हुई थी। इसके कुछ ही देर बाद अस्पताल प्रशासन ने अचानक उनकी हालत बिगड़ने और मौत हो जाने की जानकारी दी।
परिजनों ने अस्पताल कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मौत से महज पंद्रह मिनट पहले उनसे खून लाने और तुरंत पैसे जमा करने को कहा गया था। अलाउद्दीन का दावा है कि कर्मचारी ने पैसे न देने पर इलाज रोकने की धमकी दी थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सात दिनों में सात लाख रुपये जमा कराने के बावजूद दबाव बनाया जा रहा था और 400 रुपये का इंजेक्शन 4500 रुपये में लगाया गया।
घटना की जानकारी मिलने पर राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के विधायक गुलाम मोहम्मद भी अस्पताल पहुंचे और परिजनों से बातचीत की। अस्पताल परिसर में पूर्व प्रधान के समर्थकों और ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसके बाद सिविल लाइन थाना प्रभारी अरुण भाटी ने पुलिस बल के साथ स्थिति को संभालने का प्रयास किया। गुस्साए लोगों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया था।
सीओ सिविल लाइन और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में अस्पताल के जिम्मेदार लोगों और परिजनों के बीच करीब दो घंटे तक बातचीत चली। परिजनों के आरोपों पर अस्पताल प्रबंधन के सामने आने और माफी मांगने के बाद मामला शांत हुआ। पुलिस ने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लेते हुए लोगों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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