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दिल्ली में MCD का बड़ा एक्शन: 12 जोन में जर्जर और अवैध इमारतों पर चला बुलडोजर, 34 भवन ध्वस्त

दिल्ली में हालिया भवन हादसों के बाद MCD ने राजधानी के सभी 12 जोन में जर्जर, अवैध और नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। एक दिन में 34 इमारतों को ध्वस्त और 17 संपत्तियों को सील किया गया, जबकि कई अवैध निर्माणों को नोटिस जारी किए गए हैं। 1,243 PG भवनों की सुरक्षा जांच भी की जा रही है। जांच में 52 इमारतों में अवैध पांचवीं मंजिल का निर्माण मिला है। MCD का कहना है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्षों तक अवैध निर्माण होने के बावजूद समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

Sakshi Jha
Sakshi JhaJournalist
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10 सितंबर 2026 · 1:19 pm4 हज़ार व्यूज़अपडेटेड 4:57 pmनई दिल्ली
दिल्ली में MCD का बड़ा एक्शन: 12 जोन में जर्जर और अवैध इमारतों पर चला बुलडोजर, 34 भवन ध्वस्त
दिल्ली में MCD का बड़ा एक्शन: 12 जोन में जर्जर और अवैध इमारतों पर चला बुलडोजर, 34 भवन ध्वस्त

दिल्ली में हाल ही में हुए भवन हादसों के बाद नगर निगम (MCD) ने राजधानी में जर्जर, अवैध और भवन नियमों का उल्लंघन करने वाली HEADING इमारतों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया है. निगम का दावा है कि यह कार्रवाई केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि राजधानी के सभी 12 जोन में एक साथ चलाई जा रही है. MCD अधिकारियों के अनुसार, उन इमारतों की पहचान की जा रही है जो संरचनात्मक रूप से कमजोर हैं, अवैध निर्माण का हिस्सा हैं या निर्धारित भवन मानकों का पालन नहीं करतीं. इसी अभियान के तहत एक दिन में 34 इमारतों पर ध्वस्तीकरण (Demolition) की कार्रवाई की गई, जबकि 17 संपत्तियों को सील किया गया। इसके अलावा कई अवैध निर्माणों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं और आगे की कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. PG भवन भी जांच के दायरे में नगर निगम ने पेइंग गेस्ट (PG) भवनों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है. निगम के मुताबिक, दिल्ली में करीब 1,243 PG इमारतों की पहचान की गई है, जिनमें लगभग 24 हजार लोग रह रहे हैं. इन भवनों की संरचनात्मक मजबूती का मूल्यांकन किया जा रहा है और उन्हें सुरक्षित, मामूली मरम्मत योग्य, बड़ी मरम्मत की आवश्यकता वाली तथा खतरनाक श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा रहा है. अवैध निर्माण पर बढ़ी निगरानी जांच के दौरान MCD को राजधानी के विभिन्न इलाकों में 52 ऐसी इमारतें मिली हैं, जहां भवन नियमों के विपरीत पांचवीं मंजिल का निर्माण किया गया है. निगम ने संबंधित संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.तय कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन मामलों में भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है. सबसे बड़ा सवाल-कार्रवाई पहले क्यों नहीं? MCD की यह मुहिम जितनी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, उतने ही बड़े सवाल भी इसके साथ उठ रहे हैं. यदि किसी इलाके में वर्षों तक अवैध निर्माण होता रहा, अतिरिक्त मंजिलें बनती रहीं और भवन धीरे-धीरे खतरनाक स्थिति में पहुंच गए, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं होता. प्रभावी निगरानी, समय पर निरीक्षण और नियमों का सख्ती से पालन ही भविष्य में ऐसे हादसों को रोक सकता है. यदि खतरनाक इमारतों की समय रहते पहचान कर आवश्यक कदम उठाए जाएं, तो कई दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है. आगे भी जारी रहेगा अभियान MCD का कहना है कि आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा. राजधानी के सभी 12 जोन में अवैध निर्माण, असुरक्षित इमारतों और भवन नियमों के उल्लंघन पर लगातार निगरानी रखी जाएगी. हालांकि इस अभियान की वास्तविक सफलता केवल ध्वस्तीकरण या सीलिंग की संख्या से नहीं आंकी जाएगी, बल्कि इस बात से तय होगी कि क्या भविष्य में किसी संभावित हादसे से पहले ही खतरनाक इमारतों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई की जाती है. फिलहाल MCD की कार्रवाई जारी है और अब लोगों की नजर इस बात पर है कि यह सख्ती स्थायी साबित होती है या केवल बड़े हादसों के बाद ही दिखाई देती है.

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