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DU का 'Science of Happiness' कोर्स बना छात्रों की पहली पसंद, 2,000 से ज्यादा ने कराया नामांकन

दिल्ली यूनिवर्सिटी का 'साइंस ऑफ हैप्पीनेस' कोर्स छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पिछले दो वर्षों में 2,000 से अधिक छात्रों ने इसमें दाखिला लिया है। यह कोर्स मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और जीवन में संतुलन बनाए रखने की व्यावहारिक सीख देता है।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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20 जुलाई 2026 · 4:29 am936 व्यूज़
DU का 'Science of Happiness' कोर्स बना छात्रों की पहली पसंद, 2,000 से ज्यादा ने कराया नामांकन
DU का 'Science of Happiness' कोर्स बना छात्रों की पहली पसंद, 2,000 से ज्यादा ने कराया नामांकन

नई दिल्ली: पढ़ाई, करियर और प्रतिस्पर्धा के बढ़ते दबाव के बीच छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के उद्देश्य से दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने शुरू किया गया 'साइंस ऑफ हैप्पीनेस' कोर्स लगातार लोकप्रिय हो रहा है। पिछले दो वर्षों में इस कोर्स में 2,000 से अधिक छात्र-छात्राएं नामांकन करा चुके हैं, जो युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।

यह कोर्स दिल्ली यूनिवर्सिटी के वैल्यू एडेड कोर्स (VAC) के अंतर्गत 'हैप्पीनेस पोडियम' पहल का हिस्सा है। इसका उद्देश्य केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों को तनाव से निपटने, सकारात्मक सोच विकसित करने और जीवन में संतुलन बनाए रखने के व्यावहारिक तरीके सिखाना भी है।

कोर्स की रूपरेखा 'खुशी के पांच प्रमुख स्तंभों' पर आधारित है। इनमें सकारात्मक सोच विकसित करना, अपनी क्षमताओं को पहचानना, परिवार और समाज के साथ मजबूत संबंध बनाना, जीवन का उद्देश्य तय करना तथा छोटी-बड़ी उपलब्धियों का आनंद लेकर आत्मविश्वास बढ़ाना शामिल है।

इस पहल को फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दिल्ली यूनिवर्सिटी के पांच प्रमुख महिला कॉलेजों—लेडी श्री राम (LSR) कॉलेज, गार्गी कॉलेज, इंद्रप्रस्थ महिला कॉलेज, मिरांडा हाउस और दौलत राम कॉलेज—में शुरू किया गया है। इन संस्थानों की छात्राओं ने इस कोर्स में विशेष रुचि दिखाई है।

इस कोर्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पारंपरिक रटने वाली पढ़ाई की बजाय माइंडफुलनेस, मेडिटेशन, समूह गतिविधियों और खुली चर्चा के माध्यम से छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत, आत्मविश्वासी और खुशहाल जीवन जीने की कला सिखाई जाती है। विश्वविद्यालय का मानना है कि ऐसी पहलें छात्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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